!!!---: दाँतों का दर्द :---!!!
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चीजें जिनकी आपको आवश्यकता होगी
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क्वाथ
हींग
तम्बाकु
फ्लौस
बर्फ
दर्द की दवा (स्थानीय या खाने वाली)
ठंढी सेंक
रूई के गोले
लौंग
नमक
लहसुन
प्याज
गेहूँ के घास का रस
सिरका
बेबेरी
पीसी हुई अदरख
लाल मिर्च
पीसा हुआ लोबान
काली या पेपरमिंट चाय की थैली
ब्रैन्डी, वोदका, या व्हिस्की
टूथब्रश
माउथ गार्ड
तेजपत्ता
सेंधा नमक
आलू
नीम्बू
पुदिना
शराब
फिटकरी
आजकल गलत खान-पान और ठीक से देखरेख न करने के कारण लोगों में दांत के दर्द की समस्या आम हो गई है। छोटे छोटे बच्चों को अक्सर दांत में दर्द होने की शिकायत होती है। आयुर्वेद में दांतों में दर्द की समस्या का बहुत आसान उपाय बताया है।
आयुर्वेद में एक कहावत है-
नमक महीन लीजिए, अरु सरसों का तेल।
नित्य मले रीसन मिटे, छूट जाए सब मैल।
सैंधा नमक को कपड़े से छान लें। नमक को हाथ पर रखकर उसमें सरसों का तेल मिला लें। इस मिश्रण से दातों पर हल्के-हल्के मसाज करें बाद में साफ पानी से कुल्ला कर लें। इस विधि को अपनाने से आपको दातों की कई समस्याओं से निजात मिल जाएगी। इससे दातों में दांतों में पीलापन नहीं आता, दांत साफ और मजबूत होते हैं, कीड़े नहीं लगते, दर्द, मसूड़ों की सूजन, इनसे खून निकलना बन्द हो जाता है।
मसूढों और जबडों में होने वाली पीडा को दंतशूल से परिभाषित किया जाता है। हममें से कई लोगों को ऐसी पीडा अकस्मात हो जाया करती है। दांत में कभी सामान्य तो कभी असहनीय दर्द उठता है। रोगी को चेन नहीं पडता। मसूडों में सूजन आ जाती है। दांतों में सूक्ष्म जीवाणुओं का संक्रमण हो जाने से स्थिति और बिगड जाती है। मसूढों में घाव बन जाते हैं जो अत्यंत कष्टदायी होते हैं।दांत में सडने की प्रक्रिया शुरु हो जाती है और उनमें केविटी बनने लगती है।जब सडन की वजह से दांत की नाडियां प्रभावित हो जाती हैं तो पीडा अत्यधिक बढ जाती है।
१) क्वाथ
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बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।
२) लहसुन
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लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।
लहसुन के दवे को नमक में डुबोकर चबाएं, दांतों के दर्द में आराम होगा। रोज सुबह लहसुन का एक जवा चबाने से दांत मजबूत रहते हैं।
३) हींग
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हींग में कई आयुर्वेदिक गुणों का समावेश होता है। इसमें कई एंटी-इंफ्लामेट्री, एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो दांतों से दर्द में राहत प्रदान करते है। इसके इस्तेमाल के लिए आप हींग को बहुत कम मात्रा में लें और उसे दर्द वाली जगह पर लगा लें या इसे एक चौथाई पानी में घोल बनाकर माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करें।
हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भर दें। कष्ट में राहत मिलेगी।
४) तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।
५) बर्फ़ का प्रयोग
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बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।
दांतों के दर्द वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक बर्फ से सेंकाई करें। दिन में कई बार दांतों को बर्फ से सेंकने से दर्द से छुटकारा मिलेगा।
६) गरम सेक
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कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।
७) प्याज
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प्याज में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो दांतों के दर्द से राहत दिला सकते हैं। इसे कच्चा खाने से दांतों के दर्द में आराम मिलता है। अगर आपके दांतों में दर्द इतना ज्यादा है कि आप इसे कच्चा नहीं खा सकते हैं तो इसका रस निकालकर दांतों में निकाल लें।
प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।
रोज सुबह एक कच्चा प्याज खाने से भी दांतों के दर्द में आराम मिलता है। डॉक्टरों का मानना है कि हर तीन मिनट पर एक स्लाइस प्याज की खाने से मुंह में मौजूद कीटाणु मर जाते हैं और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
८) लौंग
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लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।
दांतों में दर्द हो तो मुंह में लौंग रखने से आराम मिलता है। तेज दर्द के दौरान दर्द वाले हिस्से पर लौंग का तेल लगाना बेहद फायदेमंद है।
लौंग में काफी मात्रा में एनेस्थेटिक और एनलगेसिक गुण होते हैं जो दर्द को दूर भगा देते हैं। दिन में दो से तीन बार लौंग को रखना चाहिए और इस दौरान कुछ भी न खाएं।
लौंग के तेल की कुछ बूँदों को 1/2 चम्मच या (2.5 ml) जैतून के तेल के साथ मिलाइए। एक जीवाणुरहित रूई के गोले को इस मिश्रण में भिंगोइए, तब इसे अपने दाँत या मसूड़े के दर्द कर रहे भाग के साथ लगा कर रखिए।
९) गरम पानी
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नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।
1 चम्मच (5 ml) नमक को 8 oz (250 ml) गरम पानी के साथ मिला लीजिए।
30 सेकंड तक कुल्ला करते रहिए उसके बाद थूक दीजिए । जैसी आवश्यकता हो इसे दोहराइए।
१०) पुदिना
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पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में १० बार करने से लाभ मिलेगा।
११) नीम्बू
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दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।
नींबू विटामिन सी का बड़ा स्रोत है। दांतों के दर्द वाले हिस्से पर नींबू का कतरा लगाने से दर्द से तुंरत राहत मिलती है।
१२) कैल्सियम
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मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और कैल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।
१३) मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं।
(१४) शक्कर
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शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वस्तुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।
१५) हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।
१६) दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।
अन्य उपाय
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काली मिर्च पाउडर
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दांतों में तेज दर्द से आराम के लिए एक चौथाई चम्मच नमक में एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। आपको तुरंत आराम मिलेगा।
आलू
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दांतों में दर्द के साथ सूजन हो तो आलू छीलकर उसकी स्लाइस उस भाग पर 15 मिनट तक रखें, तुरंत राहत मिलेगी।
टी बैग
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गर्म पानी में टी बैग्स रखें और उससे दर्द वाले भाग की सेंकाई करें, दांतों के दर्द में आराम होगा।
ब्रांडी
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रुई को ब्रांडी में डुबोएं और दांतों में दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे भी दांत का दर्द दूर होता है।
सरसों का तेल
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तीन से चार बूंद सरसो के तेल में एक चुटकी नमक डालकर दांतों व मसूड़ों पर मसाज करें। इससे न सिर्फ दांतों में दर्द से आराम मिलता है बल्कि मसूड़े भी मजबूत होते हैं।
लोबान के टिंचर का उपयोग कीजिए:--
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-लोबान के कसैले प्रभाव होते हैं जो दर्द भरे सूजन के कम करते हैं। यह जीवाणुओं को भी मारता है।
किसी छोटी डेगची में, 1 चम्मच (5 ml) पीसे हुए लोबान को 2 कप (500 ml) पानी में 30 मिनट तक गर्म कीजिए और तब इसे ठंढा होने दीजिए।
इस तरल के 1 चम्मच (5 ml) को 1/2 कप (125 ml) पानी के साथ मिलाइए और इस प्रकार बने घोल से प्रतिदिन पाँच छः बार कुल्ले कीजिए।
अमरुद
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अमरूद की ऊपर वाली ताजा कोमल पत्तियों को तोड़ लें और उन्हे दांतों में दर्द वाले हिस्से पर रखकर दबा लें, इससे दर्द में काफी राहत मिलेगी। हर दिन चार बार ऐसा करने काफी राहत मिलती है। आप चाहें तो इन पत्तियों को एक कप पानी में उबालकर उस पानी को माउथवॉश की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
पिपरमेंट :---
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पिपरमेंट से भी दांतों का दर्द दूर भग जाता है, खासकर उम्र बढ़नेपर होने वालों दांतों का दर्द भी पिपरमेंट से ही ठीक होता है। पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को दर्द वाले हिस्से पर डाल लें और फिर गर्म पानी से गरारा कर लें। आप चाहें तो पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर माउथवॉश की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
दर्द वाले स्थान पर गीली चाय की थैली लगाइए:---
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काली चाय में कसैला टैनिन होता है जो सूजन को कम कर सकता है। पेपरमिंट वाली हरबल चाय में भी हल्का सुन्न करने वाला प्रभाव होता है।
चाय की थैली को पानी की एक छोटी तश्तरी में गर्म करने के लिए माइक्रोवेभ करें। अतिरिक्त पानी को निचोड़ कर निकाल दें।
दुखते दाँत या मसूड़े पर चाय की थैली को दबाएँ और दाँत से हल्के से काटें जब तक दर्द धीमा न हो जाए।
तेजपत्ता
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तेजपत्ता एक प्राकृतिक दर्द निवारक है जो तुरंत ही दर्द से आराम दिला देता है। इसमें कई औषधीय गुण होते हैं जो दांतों की सड़न, बदबू आदि को दूर कर देता है। अगर किसी को मुंह में छाले हैं या किसी प्रकार का घाव है या खून आ रहा हो, तो तेजपत्ते को पीसकर उसमें नमक मिला लें इस मिश्रण को एक गिलास में डालें और इसमें थोड़ा सा वोडका मिला लें। इसे मुंह में भरे और निकाल दें। दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द छूमंतर हो जाएगा।
शराब का उपयोग करें:
सीधे लगा देने पर, अल्कोहल में आपके दाँत के दर्द को सुन्न कर देने की क्षमता होती है।
एक जीवाणुरहित रूई के गोले को ब्रैन्डी या वोदका में भिंगो लें और दुखते दाँत के ऊपर रखें।
आप व्हिस्की की एक घूंट ले कर अपने मुख में दर्द कर रहे स्थान के पास गाल में रख सकते हैं।
वनिला रस:---
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वनिला में एल्कोहल की मात्रा काफी कम होती है, इसमें एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में होता है इसके इस्तेमाल से भी दर्द में राहत मिलती है। सबसे पहले वनीला की 2-4 बूंदे एक कॉटन बॉल में लें। उसे अपने दर्द वाले दांतों के बच रखें और 15 मिनट बाद निकाल लें। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करें।
ज्वाहरे (व्हीटग्रास):---
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माना जाता है कि यह जूस मसूड़ों से टॉक्सिन्स को खींच लेती है, जिसके फलस्वरूप जीवाणुओं का बढ़ना रुक जाता है।
गेहूँ की घास का रस किसी हेल्थ फूड दुकान (health food store) से लीजिए और दिन में कई बार कुल्ले करने में इसका उपयोग कीजिए। उपयोग करते समय रस को मुख में दर्द के स्थान इसे हिलाने पर ध्यान रखें।
गेंहू के दानों को एक गमले में रोप दें और एक अंगुल होने पर उसे काट लें। यह घास, दांतों के दर्द में काफी राहत देती है इसमें बैक्टीरिया को मारने के काफी अच्छे गुण होते हैं। इसे पीस लें और इसका रस दांतों में लगा लें। बाद में गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें।
फिटकरी
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फिटकरी को तवे पर या लोहे की कडाही में पानी के साथ रखें । अब उसे जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो फिटकरी को निकालकर बारीक पीस लें । फिटकरी के 1 बटे 4 भाग पिसी हल्दी मिला लें, अब उसे लकडी की सींक की नोक से दर्द वाले स्थान पर भर दें , बहुत लाभकारी प्रयोग है ।
दाँत -दर्द में राहत के लिए बायोकेमिक कंपाउंड नंबर-23 भी काफी लाभदायक रहता है इसे किसी भी होम्योपेथिक स्टोर से ले सकते हैं।
बेबेरी (bayberry) की लेई बनाएँ:---
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बेबेरी को लेई बनाने के लिए सिरका के साथ मिलाएँ, जो दाँत दर्द से छुटकारा दिलाता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है।
1-inch (2.5-cm) बेबेरी की छाल के टुकड़े को 1/4 tsp (1.25 ml) सिरके के साथ पीस दीजिए। लेई बनाने की आवश्यकता के अनुसार अधिक छाल या सिरका मिलाइए।
लेई को अपने मुख के दर्द वाले स्थान पर सीधे लगा दीजिए और दर्द कम होने तक वहीँ रखे रहिए। तब, कुनकुने पानी से कुल्ला करते हुए इसे निकाल दीजिए।
अदरख और तेज लाल मिर्च की लेई बनाइए:---
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यदि आपके दाँत संवेदनशील हैं, तो दर्द से राहत के लिए पिसे हुए अदरख, पीसी गई लाल मिर्च और पानी से बनी लेई को सीधे संवेदनशील स्थान पर लगाया जा सकता है।
पीसे हुए अदरख की एक चुटकी को एक कप में रखिए। पानी की कुछ बूँदे तब तक मिलाते जाइए जब तक इन अवयवों को साथ हिला कर लेई बना ली जाए।
लेई में एक जीवाणुरहित रूई का गोला डुबाइए। रूई को सीधे दाँत पर रख कर तब तक वहां रखे रहें जब तक दर्द कम न हो जाए।
इस उपचार को केवल प्रभावित दाँत पर लगाएँ। इसे मसूड़े के ऊतकों पर नहीं लगाएँ, क्योंकि इससे जलन हो सकती है।
व्यावसायिक उपचारः--
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अपने डेंटिस्ट से मिलने का समय ठीक करें: यदि घरेलू उपचार के द्वारा आपके दाँत का दर्द नहीं जाता है, तो कोई भीतरी कारण होगा जिसे व्यावसायिक उपचार की जरूरत होगी।
लक्षण और परिस्थितियाँ जो सूचित करते हैं कि व्यावसायिक उपचार का अनुसरण करना चाहिए, उनमें शामिल हैं ।
घरेलू उपचार से ठीक नहीं होने वाला दर्द।
दाँत उखाड़े जाने के बाद होने वाला दर्द।
वह दर्द जिसके साथ मसूड़ों और चेहरे के ऊतकों में सूजन आ जाती है, या जिसके साथ बुखार आ जाता है या पीब निकलती है।
टूटे दाँत या चोट के कारण होने वाला दर्द।
जबड़े के कोने पर होने वाला दर्द।
प्रज्ञा दाँत के कारण होने वाला दर्द।
सिर और चेहरे पर चोट या चेहरे पर चकत्ते से होने वाला दर्द।
जबड़े के दर्द के साथ सीने में दर्द।
निगलने में कठिनाई।
दाँत को भरवा लीजिए:
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यदि दाँत के (छिद्रों) सड़ने या ढीले भरे जाने के कारण दर्द हो रहा है, तो डेंटिस्ट आपके दाँत को भर सकता है।
डेंटिस्ट सड़े हुए भाग को ड्रिल करते हुए निकाल देगा और उसे किसी यौगिक या धातु मिश्रण से भर देगा।
जैसे-जैसे भराई पुरानी हो जाती है, वे टूट सकते हैं या ढीले हो सकते हैं। आपका डेंटिस्ट भराई को निकाल देगा, कुछ नया सड़ गया है उसे ड्रिल करते हुए निकाल देगा, और उसे नए सिरे से भर देगा।
दाँत पर एक क्राउन (crown) लगवा लीजिए:
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दाँत में बहुत अधिक सड़न, कोटर, खँरोच, टूटन, या भारी संक्रमण हो जाने पर एक डेंटल क्राउन का प्रयोजन हो सकता है।
यदि दाँत की सड़न दाँत को बहुत अधिक प्रभावित करती है, तो भराई पर्याप्त उपचार नहीं हो सकती है, और तब इसके बदले, एक कैप या क्राउन का उपयोग किया जाएगा।
जब आपका डेंटिस्ट कोटरों के लिए, या संक्रमित गूदे के लिए रूट कनाल (root canal) करना चाहता है तो सड़ा हुआ गूदा निकाल दिया जाएगा और उसे क्राउन से ढक दिया जाएगा।
दाँत के अत्यधिक खरोच या टूटन के मामले में आपका डॉक्टर इस पर डेंटल क्राउन रखते हुए इसकी रक्षा कर सकता है।
मसूड़े के लुप्त टिश्यू को जोड़ना:
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यदि आपका दर्द मसूड़े के अपगमन से हो रहा है, तो डेंटिस्ट आपके क्षतिग्रस्त मसूड़े पर टिश्यू को जोड़ देगा।
टिश्यू या तो तालू से निकाले जाएँगे या मुख के आस-पास के स्थानों से लिए जाएँगे। विकल्प के रूप में, कृत्रिम मसूड़े के टिश्यू जोड़े जा सकते हैं ।
नुस्खे से एक विचेतक (desensitizer) उपचार आरंभ कीजिए:
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यह उपचार अक्सर इनेमल (enamel ) की क्षति या साधारण परंतु दाँत की अत्यंत संवेदनशीलता में निर्देशित किए जाते हैं।
विचेतक एक नुस्खे का स्थानीय उपचार है जो धीरे-धीरे दाँतों की स्नायु संवेदनशीलता को कम कर देता है। जैसे-जैसे स्नायु कम संवेदनशील होते जाते हैं, आपको दर्द कम होने का अनुभव होगा।
एक ऐंटीबायॉटिक लीजिए:
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नुस्खे के ऐंटीबायॉटिक का केवल तभी प्रयोजन होता है जब आपके मुख में संक्रमण होता है।
संक्रमण साधारणतः सड़न या चोट के कारण हुए फोड़ों का परिणाम होते हैं।
दाँत को उखड़वाइए:
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यदि भारी क्षति होने से या प्रज्ञा दाँत के प्रभाव से दाँत में दर्द हो रहा है, तो दाँत को निकलवाना या उखड़वाना पड़ेगा।
अक़ल ढ़ाड़ें को साधारणतः निकलवाना पड़ता है क्योकि वे आपके मुख में दाँतों की भीड़ कर देते हैं। जब दाँतों की भीड़ बढ़ जाती है, तब आपके मुख पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे अधिक दर्द होता है।
नियमित रूप से ब्रश और फ्लौस कीजिए:
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नई क्षति को रोकने या क्षति को और खराब होने से रोकने के लिए, आप को दिन में दो बार ब्रश और एक बार फ्लौस करना चाहिए।
जहाँ नियमित दाँतों को ब्रश करना और फ्लौस करना समय को लौटा कर वापस नहीं ला सकता और पहले से शुरू हो गई सड़न की मरम्मत नहीं कर सकता, यह भविष्य की सड़नों को रोक सकता है और सड़न-पूर्व विकैल्सीकरण (decalcification) का प्रतिकार कर सकता है।
चीनी लेना कम कर दीजिए:
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चीनी दाँतों के सड़ने का कारण है। भविष्य की समस्याओं को कम करने के लिए, आप चीनी की जो मात्रा खाते या पीते हैं उसे कम कर दीजिए।
सोडा, चीनी वाले फलों के रस, मीठी चाय या मीठी बनाई गई कॉफी कम पीजिए। अपने आहार में अधिक जल सम्मिलित कीजिए।
कैंडी और पैस्ट्री सहित, बेकार का भोजन करना कम कीजिए।
जब आप विशेष रूप से मीठा खाद्य लेते हैं, तो बाद में दाँतों को ब्रश कर लीजिए।
एक माउथ गार्ड (mouth guard) पहनिए:
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यदि आप के दाँत दर्दों में से सभी या कुछ दाँत पीसने के कारण हैं तब एक माउथ गार्ड अधिक क्षति और अधिक दर्द को रोक सकता है।
रात को या जब भी आपके दाँत पीसने की अधिक संभावना हो तब माउथ गार्ड पहन लें।
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बाय बिडंग १० ग्राम,सफ़ेद फ़िटकरी १० ग्राम लेकर तीन लिटर जल में उबालकर जब मिश्रण एक लिटर रह जाए तो आंच से उतारकर ठंडा करके एक बोत्तल में भर लें। दवा तैयार है। इस क्वाथ से सुबह -शाम कुल्ले करते रहने से दांत की पीडा दूर होती है और दांत भी मजबूत बनते हैं।
२) लहसुन
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लहसुन में जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। लहसुन की एक कली थोडे से सैंधा नमक के साथ पीसें फ़िर इसे दुखने वाले दांत पर रख कर दबाएं। तत्काल लाभ होता है। प्रतिदिन एक लहसुन कली चबाकर खाने से दांत की तकलीफ़ से छुटकारा मिलता है।
लहसुन के दवे को नमक में डुबोकर चबाएं, दांतों के दर्द में आराम होगा। रोज सुबह लहसुन का एक जवा चबाने से दांत मजबूत रहते हैं।
३) हींग
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हींग में कई आयुर्वेदिक गुणों का समावेश होता है। इसमें कई एंटी-इंफ्लामेट्री, एंटीसेप्टिक गुण होते हैं, जो दांतों से दर्द में राहत प्रदान करते है। इसके इस्तेमाल के लिए आप हींग को बहुत कम मात्रा में लें और उसे दर्द वाली जगह पर लगा लें या इसे एक चौथाई पानी में घोल बनाकर माउथवॉश की तरह इस्तेमाल करें।
हींग दंतशूल में गुणकारी है। दांत की गुहा(केविटी) में थोडी सी हींग भर दें। कष्ट में राहत मिलेगी।
४) तंबाखू और नमक महीन पीसलें। इस टूथ पावडर से रोज दंतमंजन करने से दंतशूल से मुक्ति मिल जाती है।
५) बर्फ़ का प्रयोग
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बर्फ़ के प्रयोग से कई लोगों को दांत के दर्द में फ़ायदा होता है। बर्फ़ का टुकडा दुखने वाले दांत के ऊपर या पास में रखें। बर्फ़ उस जगह को सुन्न करके लाभ पहुंचाता है।
दांतों के दर्द वाले हिस्से पर 15 से 20 मिनट तक बर्फ से सेंकाई करें। दिन में कई बार दांतों को बर्फ से सेंकने से दर्द से छुटकारा मिलेगा।
६) गरम सेक
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कुछ रोगी गरम सेक से लाभान्वित होते हैं। गरम पानी की थैली से सेक करना प्रयोजनीय है।
७) प्याज
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प्याज में एंटीसेप्टिक गुण होते हैं जो दांतों के दर्द से राहत दिला सकते हैं। इसे कच्चा खाने से दांतों के दर्द में आराम मिलता है। अगर आपके दांतों में दर्द इतना ज्यादा है कि आप इसे कच्चा नहीं खा सकते हैं तो इसका रस निकालकर दांतों में निकाल लें।
प्याज कीटाणुनाशक है। प्याज को कूटकर लुग्दी दांत पर रखना हितकर उपचार है। एक छोटा प्याज नित्य भली प्रकार चबाकर खाने की सलाह दी जाती है। इससे दांत में निवास करने वाले जीवाणु नष्ट होंगे।
रोज सुबह एक कच्चा प्याज खाने से भी दांतों के दर्द में आराम मिलता है। डॉक्टरों का मानना है कि हर तीन मिनट पर एक स्लाइस प्याज की खाने से मुंह में मौजूद कीटाणु मर जाते हैं और दर्द में तुरंत आराम मिलता है।
८) लौंग
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लौंग के तैल का फ़ाया दांत की केविटी में रखने से तुरंत फ़ायदा होगा। दांत के दर्द के रोगी को दिन में ३-४ बार एक लौंग मुंह में रखकर चूसने की सलाह दी जाती है।
दांतों में दर्द हो तो मुंह में लौंग रखने से आराम मिलता है। तेज दर्द के दौरान दर्द वाले हिस्से पर लौंग का तेल लगाना बेहद फायदेमंद है।
लौंग में काफी मात्रा में एनेस्थेटिक और एनलगेसिक गुण होते हैं जो दर्द को दूर भगा देते हैं। दिन में दो से तीन बार लौंग को रखना चाहिए और इस दौरान कुछ भी न खाएं।
लौंग के तेल की कुछ बूँदों को 1/2 चम्मच या (2.5 ml) जैतून के तेल के साथ मिलाइए। एक जीवाणुरहित रूई के गोले को इस मिश्रण में भिंगोइए, तब इसे अपने दाँत या मसूड़े के दर्द कर रहे भाग के साथ लगा कर रखिए।
९) गरम पानी
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नमक मिले गरम पानी के कुल्ले करने से दंतशूल नियंत्रित होता है। करीब ३०० मिलि पानी मे एक बडा चम्मच नमक डालकर तैयार करें।दिन में तीन बार कुल्ले करना उचित है।
1 चम्मच (5 ml) नमक को 8 oz (250 ml) गरम पानी के साथ मिला लीजिए।
30 सेकंड तक कुल्ला करते रहिए उसके बाद थूक दीजिए । जैसी आवश्यकता हो इसे दोहराइए।
१०) पुदिना
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पुदिने की सूखी पत्तियां पीडा वाले दांत के चारों ओर रखें। १०-१५ मिनिट की अवधि तक रखें। ऐसा दिन में १० बार करने से लाभ मिलेगा।
११) नीम्बू
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दो ग्राम हींग नींबू के रस में पीसकर पेस्ट जैसा बनाले। इस पेस्ट से दंत मंजन करते रहने से दंतशूल का निवारण होता है।
नींबू विटामिन सी का बड़ा स्रोत है। दांतों के दर्द वाले हिस्से पर नींबू का कतरा लगाने से दर्द से तुंरत राहत मिलती है।
१२) कैल्सियम
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मेरा अनुभव है कि विटामिन सी ५०० एम.जी. दिन में दो बार और कैल्सियम ५००एम.जी दिन में एक बार लेते रहने से दांत के कई रोग नियंत्रित होंगे और दांत भी मजबूत बनेंगे।
१३) मुख्य बात ये है कि सुबह-शाम दांतों की स्वच्छता करते रहें। दांतों के बीच की जगह में अन्न कण फ़ंसे रह जाते हैं और उनमें जीवाणु पैदा होकर दंत विकार उत्पन्न करते हैं।
(१४) शक्कर
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शकर का उपयोग हानिकारक है। इससे दांतो में जीवाणु पैदा होते हैं। मीठी वस्तुएं हानिकारक हैं। लेकिन कडवे,ख्ट्टे,कसेले स्वाद के पदार्थ दांतों के लिये हितकर होते है। नींबू,आंवला,टमाटर ,नारंगी का नियमित उपयोग लाभकारी है। इन फ़लों मे जीवाणुनाशक तत्व होते हैं। मसूढों से अत्यधिक मात्रा में खून जाता हो तो नींबू का ताजा रस पीना लाभकारी है।
१५) हरी सब्जियां,रसदार फ़ल भोजन में प्रचुरता से शामिल करें।
१६) दांतों की केविटी में दंत चिकित्सक केमिकल मसाला भरकर इलाज करते हैं। सभी प्रकार के जतन करने पर भी दांत की पीडा शांत न हो तो दांत उखडवाना ही आखिरी उपाय है।
अन्य उपाय
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काली मिर्च पाउडर
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दांतों में तेज दर्द से आराम के लिए एक चौथाई चम्मच नमक में एक चुटकी काली मिर्च पाउडर मिलाकर दर्द वाले हिस्से पर लगाएं। आपको तुरंत आराम मिलेगा।
आलू
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दांतों में दर्द के साथ सूजन हो तो आलू छीलकर उसकी स्लाइस उस भाग पर 15 मिनट तक रखें, तुरंत राहत मिलेगी।
टी बैग
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गर्म पानी में टी बैग्स रखें और उससे दर्द वाले भाग की सेंकाई करें, दांतों के दर्द में आराम होगा।
ब्रांडी
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रुई को ब्रांडी में डुबोएं और दांतों में दर्द वाले स्थान पर लगाएं। इससे भी दांत का दर्द दूर होता है।
सरसों का तेल
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तीन से चार बूंद सरसो के तेल में एक चुटकी नमक डालकर दांतों व मसूड़ों पर मसाज करें। इससे न सिर्फ दांतों में दर्द से आराम मिलता है बल्कि मसूड़े भी मजबूत होते हैं।
लोबान के टिंचर का उपयोग कीजिए:--
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-लोबान के कसैले प्रभाव होते हैं जो दर्द भरे सूजन के कम करते हैं। यह जीवाणुओं को भी मारता है।
किसी छोटी डेगची में, 1 चम्मच (5 ml) पीसे हुए लोबान को 2 कप (500 ml) पानी में 30 मिनट तक गर्म कीजिए और तब इसे ठंढा होने दीजिए।
इस तरल के 1 चम्मच (5 ml) को 1/2 कप (125 ml) पानी के साथ मिलाइए और इस प्रकार बने घोल से प्रतिदिन पाँच छः बार कुल्ले कीजिए।
अमरुद
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अमरूद की ऊपर वाली ताजा कोमल पत्तियों को तोड़ लें और उन्हे दांतों में दर्द वाले हिस्से पर रखकर दबा लें, इससे दर्द में काफी राहत मिलेगी। हर दिन चार बार ऐसा करने काफी राहत मिलती है। आप चाहें तो इन पत्तियों को एक कप पानी में उबालकर उस पानी को माउथवॉश की तरह इस्तेमाल कर सकते हैं।
पिपरमेंट :---
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पिपरमेंट से भी दांतों का दर्द दूर भग जाता है, खासकर उम्र बढ़नेपर होने वालों दांतों का दर्द भी पिपरमेंट से ही ठीक होता है। पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को दर्द वाले हिस्से पर डाल लें और फिर गर्म पानी से गरारा कर लें। आप चाहें तो पिपरमेंट ऑयल की कुछ बूंदों को पानी में डालकर माउथवॉश की तरह भी इस्तेमाल कर सकते हैं।
दर्द वाले स्थान पर गीली चाय की थैली लगाइए:---
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काली चाय में कसैला टैनिन होता है जो सूजन को कम कर सकता है। पेपरमिंट वाली हरबल चाय में भी हल्का सुन्न करने वाला प्रभाव होता है।
चाय की थैली को पानी की एक छोटी तश्तरी में गर्म करने के लिए माइक्रोवेभ करें। अतिरिक्त पानी को निचोड़ कर निकाल दें।
दुखते दाँत या मसूड़े पर चाय की थैली को दबाएँ और दाँत से हल्के से काटें जब तक दर्द धीमा न हो जाए।
तेजपत्ता
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तेजपत्ता एक प्राकृतिक दर्द निवारक है जो तुरंत ही दर्द से आराम दिला देता है। इसमें कई औषधीय गुण होते हैं जो दांतों की सड़न, बदबू आदि को दूर कर देता है। अगर किसी को मुंह में छाले हैं या किसी प्रकार का घाव है या खून आ रहा हो, तो तेजपत्ते को पीसकर उसमें नमक मिला लें इस मिश्रण को एक गिलास में डालें और इसमें थोड़ा सा वोडका मिला लें। इसे मुंह में भरे और निकाल दें। दिन में दो बार ऐसा करने से दर्द छूमंतर हो जाएगा।
शराब का उपयोग करें:
सीधे लगा देने पर, अल्कोहल में आपके दाँत के दर्द को सुन्न कर देने की क्षमता होती है।
एक जीवाणुरहित रूई के गोले को ब्रैन्डी या वोदका में भिंगो लें और दुखते दाँत के ऊपर रखें।
आप व्हिस्की की एक घूंट ले कर अपने मुख में दर्द कर रहे स्थान के पास गाल में रख सकते हैं।
वनिला रस:---
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वनिला में एल्कोहल की मात्रा काफी कम होती है, इसमें एंटीऑक्सीडेंट ज्यादा मात्रा में होता है इसके इस्तेमाल से भी दर्द में राहत मिलती है। सबसे पहले वनीला की 2-4 बूंदे एक कॉटन बॉल में लें। उसे अपने दर्द वाले दांतों के बच रखें और 15 मिनट बाद निकाल लें। ऐसा दिन में 2 से 3 बार करें।
ज्वाहरे (व्हीटग्रास):---
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माना जाता है कि यह जूस मसूड़ों से टॉक्सिन्स को खींच लेती है, जिसके फलस्वरूप जीवाणुओं का बढ़ना रुक जाता है।
गेहूँ की घास का रस किसी हेल्थ फूड दुकान (health food store) से लीजिए और दिन में कई बार कुल्ले करने में इसका उपयोग कीजिए। उपयोग करते समय रस को मुख में दर्द के स्थान इसे हिलाने पर ध्यान रखें।
गेंहू के दानों को एक गमले में रोप दें और एक अंगुल होने पर उसे काट लें। यह घास, दांतों के दर्द में काफी राहत देती है इसमें बैक्टीरिया को मारने के काफी अच्छे गुण होते हैं। इसे पीस लें और इसका रस दांतों में लगा लें। बाद में गुनगुने पानी से कुल्ला कर लें।
फिटकरी
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फिटकरी को तवे पर या लोहे की कडाही में पानी के साथ रखें । अब उसे जब पानी जल जाए और फिटकरी फूल जाए तो फिटकरी को निकालकर बारीक पीस लें । फिटकरी के 1 बटे 4 भाग पिसी हल्दी मिला लें, अब उसे लकडी की सींक की नोक से दर्द वाले स्थान पर भर दें , बहुत लाभकारी प्रयोग है ।
दाँत -दर्द में राहत के लिए बायोकेमिक कंपाउंड नंबर-23 भी काफी लाभदायक रहता है इसे किसी भी होम्योपेथिक स्टोर से ले सकते हैं।
बेबेरी (bayberry) की लेई बनाएँ:---
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बेबेरी को लेई बनाने के लिए सिरका के साथ मिलाएँ, जो दाँत दर्द से छुटकारा दिलाता है और मसूड़ों को मजबूत बनाता है।
1-inch (2.5-cm) बेबेरी की छाल के टुकड़े को 1/4 tsp (1.25 ml) सिरके के साथ पीस दीजिए। लेई बनाने की आवश्यकता के अनुसार अधिक छाल या सिरका मिलाइए।
लेई को अपने मुख के दर्द वाले स्थान पर सीधे लगा दीजिए और दर्द कम होने तक वहीँ रखे रहिए। तब, कुनकुने पानी से कुल्ला करते हुए इसे निकाल दीजिए।
अदरख और तेज लाल मिर्च की लेई बनाइए:---
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यदि आपके दाँत संवेदनशील हैं, तो दर्द से राहत के लिए पिसे हुए अदरख, पीसी गई लाल मिर्च और पानी से बनी लेई को सीधे संवेदनशील स्थान पर लगाया जा सकता है।
पीसे हुए अदरख की एक चुटकी को एक कप में रखिए। पानी की कुछ बूँदे तब तक मिलाते जाइए जब तक इन अवयवों को साथ हिला कर लेई बना ली जाए।
लेई में एक जीवाणुरहित रूई का गोला डुबाइए। रूई को सीधे दाँत पर रख कर तब तक वहां रखे रहें जब तक दर्द कम न हो जाए।
इस उपचार को केवल प्रभावित दाँत पर लगाएँ। इसे मसूड़े के ऊतकों पर नहीं लगाएँ, क्योंकि इससे जलन हो सकती है।
व्यावसायिक उपचारः--
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अपने डेंटिस्ट से मिलने का समय ठीक करें: यदि घरेलू उपचार के द्वारा आपके दाँत का दर्द नहीं जाता है, तो कोई भीतरी कारण होगा जिसे व्यावसायिक उपचार की जरूरत होगी।
लक्षण और परिस्थितियाँ जो सूचित करते हैं कि व्यावसायिक उपचार का अनुसरण करना चाहिए, उनमें शामिल हैं ।
घरेलू उपचार से ठीक नहीं होने वाला दर्द।
दाँत उखाड़े जाने के बाद होने वाला दर्द।
वह दर्द जिसके साथ मसूड़ों और चेहरे के ऊतकों में सूजन आ जाती है, या जिसके साथ बुखार आ जाता है या पीब निकलती है।
टूटे दाँत या चोट के कारण होने वाला दर्द।
जबड़े के कोने पर होने वाला दर्द।
प्रज्ञा दाँत के कारण होने वाला दर्द।
सिर और चेहरे पर चोट या चेहरे पर चकत्ते से होने वाला दर्द।
जबड़े के दर्द के साथ सीने में दर्द।
निगलने में कठिनाई।
दाँत को भरवा लीजिए:
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यदि दाँत के (छिद्रों) सड़ने या ढीले भरे जाने के कारण दर्द हो रहा है, तो डेंटिस्ट आपके दाँत को भर सकता है।
डेंटिस्ट सड़े हुए भाग को ड्रिल करते हुए निकाल देगा और उसे किसी यौगिक या धातु मिश्रण से भर देगा।
जैसे-जैसे भराई पुरानी हो जाती है, वे टूट सकते हैं या ढीले हो सकते हैं। आपका डेंटिस्ट भराई को निकाल देगा, कुछ नया सड़ गया है उसे ड्रिल करते हुए निकाल देगा, और उसे नए सिरे से भर देगा।
दाँत पर एक क्राउन (crown) लगवा लीजिए:
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दाँत में बहुत अधिक सड़न, कोटर, खँरोच, टूटन, या भारी संक्रमण हो जाने पर एक डेंटल क्राउन का प्रयोजन हो सकता है।
यदि दाँत की सड़न दाँत को बहुत अधिक प्रभावित करती है, तो भराई पर्याप्त उपचार नहीं हो सकती है, और तब इसके बदले, एक कैप या क्राउन का उपयोग किया जाएगा।
जब आपका डेंटिस्ट कोटरों के लिए, या संक्रमित गूदे के लिए रूट कनाल (root canal) करना चाहता है तो सड़ा हुआ गूदा निकाल दिया जाएगा और उसे क्राउन से ढक दिया जाएगा।
दाँत के अत्यधिक खरोच या टूटन के मामले में आपका डॉक्टर इस पर डेंटल क्राउन रखते हुए इसकी रक्षा कर सकता है।
मसूड़े के लुप्त टिश्यू को जोड़ना:
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यदि आपका दर्द मसूड़े के अपगमन से हो रहा है, तो डेंटिस्ट आपके क्षतिग्रस्त मसूड़े पर टिश्यू को जोड़ देगा।
टिश्यू या तो तालू से निकाले जाएँगे या मुख के आस-पास के स्थानों से लिए जाएँगे। विकल्प के रूप में, कृत्रिम मसूड़े के टिश्यू जोड़े जा सकते हैं ।
नुस्खे से एक विचेतक (desensitizer) उपचार आरंभ कीजिए:
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यह उपचार अक्सर इनेमल (enamel ) की क्षति या साधारण परंतु दाँत की अत्यंत संवेदनशीलता में निर्देशित किए जाते हैं।
विचेतक एक नुस्खे का स्थानीय उपचार है जो धीरे-धीरे दाँतों की स्नायु संवेदनशीलता को कम कर देता है। जैसे-जैसे स्नायु कम संवेदनशील होते जाते हैं, आपको दर्द कम होने का अनुभव होगा।
एक ऐंटीबायॉटिक लीजिए:
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नुस्खे के ऐंटीबायॉटिक का केवल तभी प्रयोजन होता है जब आपके मुख में संक्रमण होता है।
संक्रमण साधारणतः सड़न या चोट के कारण हुए फोड़ों का परिणाम होते हैं।
दाँत को उखड़वाइए:
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यदि भारी क्षति होने से या प्रज्ञा दाँत के प्रभाव से दाँत में दर्द हो रहा है, तो दाँत को निकलवाना या उखड़वाना पड़ेगा।
अक़ल ढ़ाड़ें को साधारणतः निकलवाना पड़ता है क्योकि वे आपके मुख में दाँतों की भीड़ कर देते हैं। जब दाँतों की भीड़ बढ़ जाती है, तब आपके मुख पर अधिक दबाव पड़ता है, जिससे अधिक दर्द होता है।
नियमित रूप से ब्रश और फ्लौस कीजिए:
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नई क्षति को रोकने या क्षति को और खराब होने से रोकने के लिए, आप को दिन में दो बार ब्रश और एक बार फ्लौस करना चाहिए।
जहाँ नियमित दाँतों को ब्रश करना और फ्लौस करना समय को लौटा कर वापस नहीं ला सकता और पहले से शुरू हो गई सड़न की मरम्मत नहीं कर सकता, यह भविष्य की सड़नों को रोक सकता है और सड़न-पूर्व विकैल्सीकरण (decalcification) का प्रतिकार कर सकता है।
चीनी लेना कम कर दीजिए:
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चीनी दाँतों के सड़ने का कारण है। भविष्य की समस्याओं को कम करने के लिए, आप चीनी की जो मात्रा खाते या पीते हैं उसे कम कर दीजिए।
सोडा, चीनी वाले फलों के रस, मीठी चाय या मीठी बनाई गई कॉफी कम पीजिए। अपने आहार में अधिक जल सम्मिलित कीजिए।
कैंडी और पैस्ट्री सहित, बेकार का भोजन करना कम कीजिए।
जब आप विशेष रूप से मीठा खाद्य लेते हैं, तो बाद में दाँतों को ब्रश कर लीजिए।
एक माउथ गार्ड (mouth guard) पहनिए:
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यदि आप के दाँत दर्दों में से सभी या कुछ दाँत पीसने के कारण हैं तब एक माउथ गार्ड अधिक क्षति और अधिक दर्द को रोक सकता है।
रात को या जब भी आपके दाँत पीसने की अधिक संभावना हो तब माउथ गार्ड पहन लें।
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