!!!---: आंख का घरेलू उपचार :---!!!
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यह एक सिंपल और असरदार उपचार है, जिसका प्रयोग करते ही आपको तुरंत असर दिखेगा। आँख से दिखाई न देना या कम दीखना, आँख पर चश्मा का चढा होना , इन बीमारियों का सफल उपचार करें । कृपया विश्वास और श्रद्धापूर्वक इसकी चिकित्सा करें ।
आज कल कई छोटे छोटे बच्चों के नाक पर चश्मा चढ़ा देख कर बड़ा ही दुःख होता है कि आगे चल कर इनका क्या होगा। बुढापे में चश्मा चढे़ तो इसमें कोई अचरज की बात नहीं है लेकिन छोटे बच्चों को चश्मा चढे तो कहीं ना कहीं उनके माता-पिता को भी चिंता होती है। अगर आप चाहते हैं कि आपकी या फिर आपके बच्चे की आंखों की रोशनी बढ जाए तो आपको एक घरेलू उपचार आजमाना होगा, जिससे उनकी आंखों पर चढ़ा चश्मा अपने आप ही उतर जाएगा।
(1.) सामग्री-
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बादाम- बड़ी सौंफ, मिश्री
बनाने की विधि-
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समान मात्रा में बादाम, बडी सौंफ और मिश्री ले कर पाउडर बना लें। इस मिश्रण को कांच के जार में रखें और प्रयोग करें।
प्रयोग करने की विधि-
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रात को सोने से एक घण्टा पहले 250 मिली. गरम दूध में 10 ग्राम तैयार मिश्रण मिला लें। ऐसा ही 40 दिनों तक करें और आप पाएंगे कि आपके आँखों की रोशनी बढ़ने लग जाएगी। इसका सेवन करने के दो घंटे तक पानी ना पियें।
(2.) सौंफ़ नेत्रों के लिये हितकर है। मोतियाबिंद रोकने के लिये इसका पावडर बना लें। एक बडा चम्मच भर सुबह शाम पानी के साथ लेते रहें। नजर की कमजोरी वाले भी यह उपाय करें।
(3.) विटामिन ए नेत्रों के लिये अत्यंत फ़ायदेमंद होता है। इसे भोजन के माध्यम से ग्रहण करना उत्तम रहता है। गाजर में भरपूर बेटा केरोटिन पाया जाता है जो विटामिन ए का अच्छा स्रोत है। गाजर कच्ची खाएं और जिनके दांत न हों वे इसका रस पीयें। २०० मिलि.रस दिन में दो बार लेना हितकर माना गया है। इससे आंखों की रोशनी भी बढेगी। मोतियाबिंद वालों को गाजर का उपयोग अनुकूल परिणाम देता है।
(4.) आंखों की जलन,रक्तिमा और सूजन हो जाना नेत्र की अधिक प्रचलित व्याधि है। धनिया इसमें उपयोगी पाया गया है।सूखे धनिये के बीज १० ग्राम लेकर ३०० मिलि. पानी में उबालें। उतारकर ठंडा करें। फ़िर छानकर इससे आंखें धोएं। जलन,लाली,नेत्र शौथ में तुरंत असर मेहसूस होता है।
(5.) आँवला नेत्र की कई बीमारियों में लाभकारी माना गया है। ताजे आँवले का रस ५ मिली. इतने ही शहद में मिलाकर रोज सुबह लेते रहने से आँखों की ज्योति में वृद्धि होती है। मोतियाबिंद रोकने के तत्व भी इस उपचार में मौजूद हैं।
(6.) अनुसंधान में साबित हुआ है कि कद्दू के फ़ूल का रस दिन में दो बार आंखों में लगाने से मोतियाबिंद में लाभ होता है। कम से कम दस मिनट आंख में लगा रहने दें।
(7.) घरेलू चिकित्सा के जानकार विद्वानों का कहना है कि शहद आंखों दिन में दो बार लगाने से मोतियाबिंद नियंत्रित होता है।
(8.) पालक का नियमित उपयोग करना मोतियाबिंद में लाभकारी पाया गया है। इसमें एंटीआक्सीडेंट तत्व होते हैं। पालक में पाया जाने वाला बेटा केरोटीन नेत्रों के लिये परम हितकारी सिद्ध होता है। ब्रिटीश मेडीकल रिसर्च में पालक का मोतियाबिंद नाशक गुण प्रमाणित हो चुका है।
(10.) एक और सरल उपाय बताते हैं| अपनी दोनों हथेलियां आपस में रगडें कि कुछ गर्म हो जाएं| फिर आंखों पर ऐसे रखें कि ज्यादा दबाव मेहसूस न हो। हां, हल्का सा दवाब लगावे। दिन में चार-पांच बार और हर बार आधा मिनिट के लिये करें। आंखों की रोशनी बढाने का नायाब तरीका है|
(11.) भोजन के साथ सलाद ज्यादा मात्रा में शामिल करें । सलाद पर थोडा सा जेतून का तेल भी डालें। इसमें प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने के गुण हैं जो नेत्रों के लिये भी हितकर है।
(12.) केवल बादाम का सेवन भी आँखों के लिए बहुत फायदेमंद होता है| रोजाना चलते फिरते ८-१० बादाम खाने से जरूरी मात्रा में विटामिन ई प्राप्त होने से आँखें स्वस्थ रहती हैं| बादाम में रेशा,वसा,विटामिन और मिनरल पर्याप्त मात्रा में होते हैं| आयुर्वेद में उल्लेख है कि बादाम को भिगोकर खाने के बजाय अंकुरित करके खाना ज्यादा लाभप्रद होता है| अंकुरित करने के लिये बादाम १२ घंटे पानी में भिगोएँ | छानकर बादाम सुखा लें| कांच के जार में रखें और अंकुरित होने के लिये ३- ४ दिन सूती कपडे में बाँधकर छत में लटका दे । अंकुरित होने के बाद चबा-चबाकर खा लें ।
रात को नो बादाम भिगोएँ ,सुबह पीसकर पानी में घोलकर पी जाएँ| इससे आँखे स्वस्थ रहती हैं| और निरंतर उपयोग से आँखों का चश्मा भी उतर जाएगा|
(13.) इलायची आँखों के लिये बहुत लाभदायक होती है\ रात को सोने से पहले २ इलायची पीसकर दूध में डालें| अच्छी तरह उबालकर फिर मामूली गरम हालत में पी जायें| इससे आँखों की रोशनी बढ़ती है|
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