आयुर्वेद और हमारा जीवन

शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्

रविवार, 3 अप्रैल 2016

लहसुन खाने के ये 5 फायदे

लहसुन खाने के ये 5 फायदे
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यूं तो लहसुन को भारतीय रसोई में स्वाद बढ़ाने वाला बताया गया है परन्तु आयुर्वेद की दृष्टि से भी लहसुन के बहुत फायदे हैं। जानिए लहसुन खाने के ऐसे ही कुछ फायदे जिनसे आप दर्जनों बीमारियों को खुद से दूर रख सकते हैं-
(1) खाली पेट लहसुन खाने पर यह पेट की सफाई करता है तथा शरीर के विषैले तत्वों को बाहर निकालता है जिससे शरीर निरोगी तथा स्वस्थ रहता है।
(2) अगर आप डायबिटीज के मरीज है तो खाली पेट कच्चे लहसुन का प्रयोग शुगर के लेवल को कंट्रोल कर आपकी मदद करता है।
(3) कच्चे लहसुन का प्रयोग हाई ब्लडप्रेशर (बीपी) की बीमारी का बेहद कारगर उपाय है। यह ह्रदय में रक्तसंचार को नियमित कर ह्रदय रोगों की संभावना को न्यूनतम करता है।
(4) सुबह-सुबह भूखे पेट कच्चे लहसुन चबाने से जोड़ों का दर्द तुरंत दूर होता है साथ ही शरीर की रोग प्रतिरोधक शक्ति भी बढ़ती है। ऐसे आदमी को छोटी-मोटी बीमारियां तो होती ही नहीं हैं।
(5) लहसुन में कई प्रकार के आवश्यक मिनरल्स जैसे मैग्नीज, मैग्नीशियम, पोटेशियम आदि होते हैं जो अन्य किसी प्रकार से प्राप्त नहीं हो सकते। लहसुन खाने से शरीर को इन मिनरल्स की आपूर्ति हो जाती है जिससे शरीर स्वस्थ रहता है।
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जीवनभर युवा बने रहे

जीवनभर युवा बने रहे
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शरीर की त्वचा की देखभाल बढ़ती उम्र के साथ जरूरी है. त्वचा को स्निग्ध ,कोमल और स्वस्थ बनाए रखने के लिए ये पांच फूड आपके लिए मददगार साबित हो सकते है. इनके सेवन से आपकी त्वचा स्वस्थ और चमकदार रहती है !
(१) संतरा:-----
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संतरे में भरपूर मात्रा में विटामिन सी पाया जाता है, जिससे त्वचा की रंगत बनी रहती है. संतरे के सेवन से आपकी त्वचा स्वस्थ बनी रहती है और वह हमेशा निखरी हुई नजर आती है.
(२) गाजर:
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गाजर के के सेवन से आपकी त्वचा भीतर से साफ होती है और चेहरे पर इसे लगाने से आपकी त्वचा पर मौजूद निशान दूर होते हैं. गाजर के जूस का नियमित सेवन करने से आपकी रंगत निखरती है. गाजर में विटामिन ए पर्याप्त मात्रा में पाया जाता है.
(३) नींबू:-----
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नींबू में प्राकृतिक ब्लीचिंग गुण पाया जाता है. प्राकृतिक लाइटनिंग एजेंट होने के कारण यह त्वचा के लिए काफी फायदेमंद होता है. यही वजह है कि नींबू का इस्तेमाल सौंदर्य प्रसाधनों में किया जाता है.
(४) तरबूज:----
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तरबूज में कई एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो त्वचा को निखारने में मददगार साबित होते हैं. साथ ही इससे त्वचा को रूखा बनाने वाला तनाव और थकान भी दूर रहता है.
(५) अखरोट:----
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अखरोट एक बेहतरीन ब्यूटी टॉनिक है, जो डार्क सर्कल, ड्राई स्क‍िन, पिंपल जैसी आम समस्याओं को दूर करता है. अखरोट त्वचा में रक्त का संचार अच्छा कर देते हैं जिससे त्वचा में निखार आ जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में ओमेगा-3 होता है जो चेहरे की स्किन को अच्छा बना देती है.
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शनिवार, 2 अप्रैल 2016

अमृत से कम नहीं है गिलोय

अमृत से कम नहीं है गिलोय
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उपचार की वैकल्पिक कही जाने वाली पद्धतियां, वास्तव में प्राथमिक हैं। इन पद्धतियों की औषधियों और उपचारों में बहुधा ऐसे तत्वों व जड़ी-बूटियों का उपयोग होता है, जो हमारे आसपास प्रकृति में आसानी से मिल जाते हैं। आयुर्वेद में ऐसे ही एक चमत्कारिक जड़ी-बूटी है – "गिलोय" जैसा नाम, वैसा काम

आयुर्वेद में गिलोय को अमृत बेल भी कहा जाता है। कारण है, न तो यह खुद मरती है और न ही सेवन करने वाले को कोई रोग होने देती है। गिलोय का सेवन किसी भी उम्र के व्यक्ति द्वारा किया जा सकता है। यह चमत्कारिक जूड़ी-बूटी दस्त जैसे सामान्य से लेकर डेंगू व कैंसर जैसे प्राण घातक रोगों में भी बहुत लाभदायक है। यह भारत में 1 हजार फीट की ऊंचाई तक सर्वत्र पाई जाती है।

प्राकृतिक आवास और संरचना
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गिलोय, बेल के रूप में देश के लगभग हर कोने में पाई जाती है। खेतों की मेंड़, घने जंगल, घर के बगीचे, मैदानों में लगे पेड़ों के सहारे कहीं भी गिलोय की बेल प्राकृतिक रूप से अपना घर बना लेती है। इसके पत्ते देखने में पान की तरह और हरे रंग के होते हैं। समय होने पर इसमें गुच्छे में छोटे लाल बेर से कुछ छोटे फल भी लगते हैं।

वैज्ञानिकों ने गिलोय के पौधे में से विभिन्न प्रकार के तत्वों को प्राप्त किया है। गिलोय में बरबेरिम, ग्लुकोसाइड गिलाइन आदि रासायनिक तत्व पाए जाते हैं। इसके काण्ड से एक स्टार्च (गुडूची सत्व) निकलता है, जो त्रिदोषशामक है।

स्वास्थ्य लाभ
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गिलोय के 10 इंच का टुकड़ा और तुलसी के 8-10 पत्ते लेकर पेस्ट बना लें। उसको पानी में उबालकर काढ़ा बनाएं। इसको दिन में 2 बार लेने से बुखार उतरता है। बच्चों और बड़ों, दोनों में दृष्टि कमजोर हो जाना सामान्य दोष है। 10 मिली गिलोय का रस, शहद या मिश्री के साथ सेवन करने पर दृष्टि लाभ निश्चित है।
रक्त विकार के कारण पैदा होने वाले रोगों जैसे खाज, खुजली, वातरक्त आदि में शुद्ध गुगुल के साथ लेने से लाभ होता है। इससे अमृतादि गुग्गलू बनाया जाता है। गिलोय का काढ़ा मूत्र विकरों में भी लाभदायक है। गिलोय के काढ़े में अरंडी का तेल मिलाकर सेवन करने से जटिल संधिवात रोग भी दूर होता है। गिलोय के अनेक स्वास्थ्य लाभ हैं।

विशेषज्ञों ने पाया कि गिलोय में रोग प्रतिरोधक प्रणाली के आलावा कई तरह के बेहतर गुण हैं। इसके एंटी-स्ट्रेस और टॉनिक गुणों को भी क्लीनिकली प्रमाणित किया जा चुका है। बच्चों में इसके बहुत अच्छे नतीजे प्राप्त हुए, कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि गिलोय या अमृता पर यथा नाम, तथा गुण सही बैठता है।

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